कोरोना में कारगर है योग और व्यायाम | Yog and Exercise for Corona Patient in Hindi

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Yoga for Corona Patient image

घर में रहकर भी आप अपने आप को corona दुष्प्रभाव से कैसे बचा सकते हैं? इस लेख में हम exercise for corona patient in Hindi और yoga for corona patient in Hindi के बारे में बात करेंगे। एक बार फिर से पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। ऑक्सीजन की कमी हो रही है। लोग तनाव की स्थिति में आ गए हैं, लेकिन आप घर में रहकर भी अपने आप को कोरोना दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं।

कुछ इस तरह के मरीज जैसे कि ल कवा ग्रसित स्पेशल बच्चे या जो लोग नियमित रूप से फिजियोथेरेपी करवा रहे थे या योगा सेंटर जा रहे थे। वह कोरोना के संक्रमण के चलते हॉस्पिटल या योगा सेंटर नहीं जा रहे हैं। उनके अभिभावक फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह लेकर एक्सरसाइज और योग करवा सकते हैं।

कोरोना संक्रमण से मरीज के सिर्फ फेफड़ों पर असर होता है। जिन कोरोना संक्रमित मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था और जिनको सांस की काफी शिकायत थी, जिन लोगों को खांसी बनी रही, चलते समय या व्यायाम करते समय सांस फूलने लगी हो उनमें पलमोनरी फाइब्रोसिस की समस्या मिलती है। इसमें चेस्ट फिजियोथैरेपी से काफी राहत मिलती है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी यह माना है कि कोरोना के मरीजों में लक्षणों से निजात दिलाने और कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद मरीज को तंदुरुस्त करने में फिजियोथेरेपी और योग काफी कारगर है।

कोरोना के लिए फिजियोथेरेपी | Physiotherapy for Corona in Hindi

  • लंबी गहरी सांसे लीजिए।
  • हाथों को छाती पर रखकर नाक से गहरी लंबी सांस ले, छाती फुलाए और मुंह से सांस छोड़ें।
  • जोर से खांसने की कोशिश करें।
  • सांस की एक्सरसाइज डिवाइस इंसेंटिव स्पायरोमीटर का प्रयोग करें। अगर यह डिवाइस नहीं मिल रही है तो गुब्बारे फुलाने की कोशिश करें।
  • जितना हो सके अपने आप को व्यस्त रखें, जिससे कि आपकी मांसपेशियां सुचारू रूप से काम करती रहे और आप तनावमुक्त रहें।

Chest Physical Therapy FOR CORONA

कोरोना के लिए व्यायाम | Exercise for corona in Hindi

आरएम सर्कल सीधे खड़े होकर दोनों हाथों और कंधों को 90 डिग्री पर 20-20 बार clockwise और anticlockwise घुमाएं।

एल्बो कर्ल दीवार के सहारे खड़े होकर अपनी अंगुलियों को मोड़कर भौहों और कान के बीच में रखें और अपनी कोहनियों को मिलाएं। इस प्रक्रिया को 20 बार दोहराएं। ज्ञात रहे इस पोजीशन में आपका सिर और एड़िया दीवार से सटे हो।

कैट कैमल पोजिशन इस एक्सरसाइज में हाथों और घुटनों के बल झुके और सांस खींचते हुए सिर को ऊपर और आगे की तरफ खींचते हुए कमर के निचले हिस्से को नीचे लेकर आए। ऐसा ही वापस करते हुए गर्दन को नीचे की तरफ ले जाते हुए और कमर के हिस्से को जितना हो सके ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते जाएं। इस प्रक्रिया को 10 से 20 बार दोहराएं। इसमें सांस लेने में कठिनाई और कूल्हे व कमर के दर्द में राहत मिलेगी।

काउंटर स्ट्रेच किसी ऊंची टेबल पर दोनों हाथों को रखकर अपने शरीर को नीचे की तरफ और कूल्हों को पीछे की तरफ खींचे और कुछ देर ऐसे ही रहे। ज्ञात रहे कि आप के कुल्ले एवं पैर सीधे हों और सांस को सुचारू रूप से चलने दें। ऐसा 10 बार दोहराएं।

योग प्राणायाम से कोरोना को करें परास्त | Yog and Pranayam for Corona Patient  in Hindi

बिहार योग विद्यालय मुंगेर के योग प्रशिक्षक राजीव कुमार सिंह योग के जरिए निरोग रहने के कुछ गुर सिखा रहे हैं। उनकी मदद से हम कोरोना काल में फायदा पहुंचाने वाले yoga for corona patient के बारे में जानेंगे। यह कोई दवा या इलाज नहीं है बल्कि सुझाव है, जिन्हें अपनाकर रोग प्रतिरोधी क्षमता बेहतर की जा सकती है।

कपालभाति प्राणायाम | Kapalbhati Pranayam for Corona in Hindi

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फायदे

  • इसका प्रभाव शरीर के लगभग सभी अंगों पर पड़ता है।
  • वजन घटाने, अनिद्रा, दिल संबंधित विकार, कम सुनाई पड़ना, बीमारियों से बचाव के लिए कपालभाति उपयुक्त है।
  •  पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन क्षमता भी मजबूत बनती है।
  •  डायबिटीज के रोगियों के लिए यह प्राणायाम रामबाण है।
  •  फेफड़ों की समस्या से पीड़ित है तो इसका अभ्यास रोजाना सुबह व शाम करें।

विधि

ध्यान के किसी आसन में बैठ जाए। आंखों को बंद कर लें। स्वास के प्रति सजग रहें। लंबी और गहरी सांस लेनी है और इसके बाद तेजी से छोड़नी है। बारी-बारी से दोनों नासिकाओ से अभ्यास करें। इसके बाद दोनों नासिकाओं से एक साथ सांस ले और तेजी से छोड़े।

नाड़ी शोधन प्राणायाम | Nadishodhan Pranayam for Corona in Hindi

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फायदे

  • शरीर में 72000 नाडिया हैं। इनमें तीन मुख्य है इला, पिंगला और सुषुम्ना। नाड़ी शोधन से यह तीनों प्रभावित होती हैं।
  • मनुष्य एकाग्रचित्त होता है गुस्सा, अनिद्रा, हाइपरटेंशन आदि से निजात मिलती है।
  • यह छात्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्राणायाम माना गया है।
  • प्रतिकूल परिस्थितियों में खुद को नियंत्रित रखने में यह काफी कारगर है।

विधि

किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठ जाएं। बाई हथेली घुटने के ऊपर ज्ञान अथवा चीन मुद्रा की स्थिति में रखनी है। दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा अंगुलियों को दोनों भौहों के बीच में रखेंगे और अंगूठे से नाक के दाएं छेद को बंद करेंगे। भाई नासिका से गहरी सांस लेंगे। कुछ देर सांस रोकने के बाद उसे दाहिनी नासिका से छोड़ेंगे। इसके बाद दाहिनी नासिका से सांस लेकर कुछ देर सांस को अंदर रोके और बाएं नासिका से सांस छोड़ें। सांस लेने, रोकने और छोड़ने की क्रिया को पूरक, कुंभक और रेचक कहा जाता है। इस प्रक्रिया को 10 से 15 मिनट तक दोहराएं। (Yoga for Corona Patient)

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